Dasha Mata Vrat Katha 9 | Dasha Mata ki Kahani 9 | Dasha Mata ki navi Kahani

Hindi

एक चिड़िया की कहानी

एक पेड़ पर दो पक्षी रहते थे। एक नर और एक मादा पक्षी थी। मादा पक्षी के बच्चे नहीं होते थे। प्रायः दूसरे पक्षी इस बात को लेकर उसका उपहास बनाया करते थे। इससे वह चिड़िया अत्यंत दुखी रहती थी।

स्त्रियों द्वारा चिड़िया को दशा माता के गंडे देना

एक दिन वह अपनी स्थिति पर विचार करती हुई नदी में पानी पीने गई। वहाँ कुछ स्त्रियाँ दशा माता के गंडे ले रही थीं। उन्होंने आपस में कहा कि यहाँ कोई स्त्री या पुरुष तो है नहीं जिसको यह गंडा दे देते।

  • उन्होंने एक गंडा उस चिड़िया के गले में बांध दिया।
  • उन्होंने चिड़िया को भी समझा दिया कि उसे नौ दिन तक रोज़ इस जगह आकर कथा सुननी है।
  • उन्होंने चिड़िया को यह भी समझा दिया की दसवें दिन इक्कीस गेहूँ लाकर एक गेहूँ तुम खुद चुन लेना।

दशा माता की कृपा

चिड़िया ने नौ दिन तक प्रेमपूर्वक कथा कहानी सुनी। दसवें दिन स्त्रियों की बतायी विधि के अनुसार, गंडा पानी में डालकर पारणा किया। कुछ दिनों के बाद उस चिड़िया के बहुत बच्चे पैदा हुए। अन्य चिड़ियों को बड़ा आश्चर्य हुआ। वे बोलीं कि इसके तो बच्चे होते ही नहीं थे, यह कैसे हुआ?

चिड़िया ने उन्हें बताया कि यह सब दशा माता की कृपा से हुआ है। चिड़िया ने बाकी सभी चिड़ियों को गंडा लेने और पूजा करने की विधि बता दी। तब तो जंगल में सभी चिड़िया दशामाता का व्रत करने लगीं। हे दशामाता जैसी कृपा आपने चिड़िया पर की वैसी सभी पर करना।

सीखें

  • अगर किसी के जीवन में कोई कमी है तो हमें उसका उपहास नहीं करना चाहिए।
  • ईश्वर की कृपा से किसी का भी समय , कभी भी बादल सकता हैं , जो उसे प्रगति के पथ पर ले जाता है।

दशा माता की पहली कहानी

दशा माता की दूसरी कहानी

दशा माता की तीसरी कहानी

दशा माता की चौथी कहानी

दशा माता की पाँचवी कहानी

दशा माता की छठी कहानी

दशा माता की सातवीं कहानी

दशा माता की आठवीं कहानी

दशा माता की नवी कहानी

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