Aarti Sangrah (आरती संग्रह)

भारत में आपने अक्सर देखा होगा कि शाम को घर पर सब लोग पूजा करते हैं, या जब आप मंदिर जाते हैं, तो वहाँ कई सारे लोग एकत्रित होकर, एक छोटी सी थाली में दीया जलाकर, भगवान के सामने गोल-गोल घूमते हैं ? कुछ लोग मंदिर का घंटा बजते हैं, और कुछ लोग ढोलक, नगाड़ा, या घंटियाँ । बस, इसे ही आरती कहते हैं।

‘आरती’ एक संस्कृत शब्द है। इसका मतलब है—भगवान को अर्पण हमारा प्यार, सम्मान और श्रद्धा। यही भगवान के लिए अपनापन हम उन्हें दिया दिखाकर जताते हैं।

अब बात आती है की आरती का क्या महत्व है ? इसका मुख्य महत्व है भगवान से अपना प्यार जताना। जैसे हम अपने मम्मी-पापा या दोस्तों को बताते हैं कि हम उनसे कितना प्यार करते हैं, वैसे ही आरती के जरिए हम भगवान को अपना प्यार जताते हैं। अगर किसी कमरे में बिल्कुल अंधेरा होता है, और हम एक छोटा सा दीया जलाते हैं, तो सारा अंधेरा गायब हो जाता है ? वैसे ही जब हम आरती का दिया जलाते हैं, तो हमारे मन की सारी बुरी बातें, डर और अज्ञानता दूर हो जाती है। हमारे दिमाग में उजाला भर जाता है।

जब कई लोग मिलकर आरती करते वक्त ताली बजाते हैं, घंटियाँ बजाते हैं, और मिलकर आरती गाते हैं, तो वह माहौल बहुत सुंदर और ज़िंदादिल हो जाता है ! हमारे कान, आँख और हाथ सब मिलकर भगवान की पूजा में लग जाते हैं, जिससे मन एकदम शांत हो जाता है।

हम आरती कब और क्यों करते हैं ? हमारे घरों में दादी या मम्मी रोज़ सुबह और शाम को भगवान के आगे दिया जलाकर आरती करती हैं। यह दिन की सकारात्मक शुरुआत या दिन को अच्छे से खत्म करने का सबसे सही तरीका है। इसके अलावा जब हम भगवान के सामने बैठकर कोई पाठ करते हैं, तो आरती उस पूजा की सबसे आखिरी कड़ी होती है । दिवाली हो, नवरात्र हो या घर में कोई खुशी का मौका हो, सब लोग मिलकर ढोल-मंजीरे के साथ आरती जरूर करते हैं।

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