Chink Mata ki Kahani | Sarp aur Sarpini Tatha Sahukaar ki Katha

छींक माता की कहानी

लोककथा • पढ़ने का समय: कुछ मिनट

छींक माता की कहानी

सर्प देवता, साहूकार और छींक के नियम से जुड़ी एक लोककथा

कहानी

यह कथा साहूकार के अनुभवों, सर्प देवता के न्याय और छींक के नियम को क्रम से सुनाती है।

जंगल में साहूकार का विश्राम

एक साहूकार परदेश से लौट रहा था। रात हो जाने पर वह जंगल में ही रुक गया। वहाँ एक सर्प ने पूरी रात उसकी रखवाली की। सुबह होते ही साहूकार ने सर्प देवता को दूध और पताशा खिलाया।

सर्प देवता का हुकुम

दूध-पताशा पाकर सर्प प्रसन्न हुए। तभी सर्प देवता को किसी को डसकर आने का हुकुम हुआ। सर्पिणी बोली कि वह भी उनके साथ जाएगी, पर सर्प देवता ने उसे वहीं रहने को कहा।

लक्ष्मण रेखा और दूसरा सर्प

सर्पिणी ने कहा, “मेरे आगे लक्ष्मण रेखा खींच जाइए, मुझे दूसरे सर्प का आना पसंद नहीं है।” सर्प देवता रेखा खींचकर चले गए। थोड़ी देर बाद दूसरा सर्प आया और सर्पिणी उससे हँसी-मज़ाक करने लगी। सर्प देवता के लौटने का समय हुआ तो वह भीतर जाकर सो गई।

सात बार चिमटे की चोट

यह सब साहूकार ने देख लिया। उसे सर्पिणी पर गुस्सा आया, इसलिए उसने जाकर उसे चिमटे से सात बार मारा और लौट आया। सर्प देवता आए तो सर्पिणी ने शिकायत की कि आपने तो साहूकार की रक्षा की, पर उसने मुझे चिमटे से मारा है।

पानी के घड़े के पीछे छिपे सर्प

सर्प देवता ने कहा कि कोई कारण अवश्य होगा। सच जानने के लिए वे पानी के घड़े के पीछे छिप गए। उधर साहूकार परिंडे से लोटा भरकर जाने लगा, तभी उसे छींक आ गई।

छींक का नियम और सच का खुलना

साहूकारणी बोली, “छींक हो गई, बैठ जाओ।” ऐसा तीन बार हुआ तो साहूकार झुंझला गया। उसने रात वाली बात सुनाई कि सर्प देवता ने उसकी रक्षा की, पर सर्पिणी का व्यवहार देखकर उसने उसे सात बार चिमटे से मारा था।

“रात को तो सर्पिणी की लीला देखी, यहाँ घर पर तुम्हारी बातें।”

पुत्र का वरदान और अंतिम परिणाम

साहूकार की बात सुनकर सर्प देवता बाहर आए और प्रसन्न होकर बोले, “साहूकार, मांग, क्या चाहता है?” साहूकार के पुत्र नहीं था, इसलिए उसने पुत्र मांगा। सर्प देवता ने उसे आशीर्वाद दिया और घर जाकर क्रोध में सर्पिणी की नाक काट दी। इस प्रकार छींक का नियम रखने पर साहूकार को पुत्र प्राप्त हुआ।

कहानी की सीख

छींक आ जाए तो उसका नियम रखना चाहिए और तुरंत शुभ काम नहीं करना चाहिए। कथा में साहूकार ने इस नियम का पालन किया, जिसके बाद उसे पुत्र का आशीर्वाद मिला।

खोटी की खरी, अधूरी की पूरी।

छींक माता की कहानी: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कहानी के मुख्य प्रसंगों के सीधे और संक्षिप्त उत्तर।

छींक माता की कहानी किस बारे में है?

यह साहूकार, सर्प देवता, सर्पिणी और छींक के नियम की लोककथा है, जिसमें तुरंत शुभ काम न करने की सीख दी गई है।

साहूकार ने सर्पिणी को चिमटे से सात बार क्यों मारा?

साहूकार ने सर्पिणी को दूसरे सर्प के साथ हँसी-मज़ाक करते देखा, इसलिए उसे गुस्सा आया और उसने चिमटे से सात बार मारा।

साहूकार को छींक आने के बाद क्या हुआ?

साहूकारणी ने हर बार उसे बैठने को कहा। तीसरी बार साहूकार ने झुंझलाकर सर्पिणी वाली पूरी बात बता दी, जिसे सर्प देवता ने सुन लिया।

सर्प देवता से साहूकार ने कौन-सा वरदान मांगा?

साहूकार के पुत्र नहीं था, इसलिए उसने सर्प देवता से पुत्र मांगा और उसे आशीर्वाद मिला।

छींक माता की कहानी कौन-सा नियम सिखाती है?

कहानी सिखाती है कि छींक आने पर छींक का नियम रखना चाहिए और तुरंत शुभ काम नहीं करना चाहिए।

Vrat Katha Sangrah

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