Dasha Mata Vrat Katha 5 | Dasha Mata ki Kahani 5 | Dasha Mata ki panchvi Kahani

HindiEnglish

बहू का सास से छुप कर दशा माता का व्रत करना

एक गांव में एक सास ने अपनी बहू से कहा कि जाओ आग लगाकर भोजन बनाओ। बहू आग लेने गई। उस दिन गांव में घर-घर में दशा माता की पूजा थी। इस कारण किसी ने भी उसको आग नहीं दी। वह खाली हाथ लौट आई।

शाम के समय वह पड़ोसनों के पास गई, और उनसे बोली कि, मेरी सास तो कभी डोरा लेती नहीं है। परंतु अब की बार जब डोरे पड़ें, तब मुझको भी बताना। मैं भी डोरा लूंगी। अगली बार जब डोरे पड़े, तब बहू ने अपनी सास से छुपाकर दशा माता का डोरा ले लिया। 9 दिन तक उसने पड़ोसियों के पास जाकर कथा कहानियाँ सुनी।

पूजा और छिपा हुआ गोला

दसवें दिन उसे चिंता हुई कि अब पूजा कैसे करूंगी। तब वह अपने मन ही मन दशा माता का ध्यान करने लगी कि, यदि सासूजी कहीं चली जाती हैं, तो मैं भी पूजा कर लूँ।

दशा माता की प्रेरणा से सास को खेतों पर जाने का ख्याल आया। उसने बहू से कहा कि मैं खेत पर जा रही हूँ । जब मैं आऊँ तब तक भोजन तैयार रखना। अगर मुझे देर हो जाए तो मुझे खेत पर ही खाना देने आ जाना।

बहू तो यही चाहती थी। उसने तुरंत अपनी हामी भर दी। ज्यों ही सासूजी घर से बाहर गई, त्यों ही बहू ने स्नान करके विधिवत दशा माता की पूजा संपन्न करी। उसके बाद वह पूजा की सामग्री मिट्टी के गोले में रखकर, उसे विसर्जित करने के लिए, ले ही जाने वाली थी, कि अचानक सासू जी वापस आ गई। तब बहू ने जल्दी से उस गोले को छाछ की मटकी में छिपा दिया।

मिट्टी के गोले का सोने के गोले में बदलना

सास ने आते ही बहू से पूछा कि, तू अभी तक मेरे लिए खाना क्यों नहीं लायी? बहू ने जवाब दिया कि, आज मैंने सिर धोया था। इसी कारण रसोई करने में थोड़ी देर हो गई। मैं अभी थाली परोसती हूँ। आप भोजन कीजिए। सास का गुस्सा शांत हो गया।

वह रसोई में बैठी ही थी कि, उसका लड़का भी आ गया। वह भी अपनी माँ के साथ भोजन करने बैठ गया। सास भोजन करके उठने ही वाली थी कि, तभी लड़का बोला कि, मुझे तो छाछ भी पीनी है। सास ने बहू से कहा कि अपने पति को छाछ लाकर दे दे। बहू बोली कि मैं तो रसोई के भीतर हूँ, आप ही दे दो।

सास खुद छाछ लेने गई। परंतु ज्यों ही उसने छाछ की मटकी उठाई कि, उसमें उसे कुछ हिलता हुआ सुनाई दिया। सास ने मटके में हाथ डाला तो एक बड़ा सोने का गोला था।

सास का हृदय परिवर्तन

सास ने बड़े आश्चर्य से बहू से पूछा कि अरे इसमें क्या है? इसके बारे में मुझे अभी बता, वरना मैं तेरी खबर लेती हूँ। बहू बोली कि मैं क्या जानू, मेरी दशा माता ही जाने।

मैंने चोरी से दशा माता का डोरा लिया था, और चोरी से पूजा की थी। आप अचानक आ गई। इसलिए मैं गंडा और पुजा सामाग्री जल में विसर्जित करने नहीं जा सकी। और आपके डर के मारे मैंने गंडा इस मटके में छुपा दिया। दशा माता ने उस गंडे को सोने का कर दिया। अब इसमें मैं क्या करूँ?

सास ने बहू को गले से लगा लिया। सास ने बहू से कहा कि, अब मैं भी तेरे साथ गण्डा लिया करूंगी। और विधिवत दशा माता का व्रत और पूजन किया करूंगी।

हे दशा माता जैसे तुमने सास बहू को दिया, ऐसे ही अपने सब भक्तों को दिया करो।

सीखें

  • ईमानदारी और भक्ति का फल मीठा होता है।
  • विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और बुद्धिमानी से काम लेना चाहिए।
  • भगवान की कृपा हमेशा अपने भक्तों पर होती है।

दशा माता की पहली कहानी

दशा माता की दूसरी कहानी

दशा माता की तीसरी कहानी

दशा माता की चौथी कहानी

दशा माता की पाँचवी कहानी

दशा माता की छठी कहानी

दशा माता की सातवीं कहानी

दशा माता की आठवीं कहानी

दशा माता की नवी कहानी

Chalisa Sangrah (चालीसा संग्रह)

Aarti Sangrah (आरती संग्रह)

Vrat Katha Sangrah (व्रत कथा संग्रह)

Daughter-in-law fast without mother in law knowledge

In a village, a mother-in-law told her daughter-in-law to go and bring fire to cook food. The daughter-in-law went to neighbours to get fire. That day, Dasha Mata’s puja was being performed in every house in the village. Therefore, nobody gave her fire. She returned empty-handed.

In the evening, she again went to her neighbors to get fire. She also told her neighbour that , “My mother-in-law never observes the Dasha Mata fast. But this time, when the threads (for the fast) are distributed, please let me know. I will also observe the fast.”

The next time when the threads were distributed, the daughter-in-law secretly took a thread for Dasha Mata’s fast hiding from he mother in law. For 9 days, she went to her neighbors and listened to stories and religious narratives as part of rituals of observing Dasha Mata fast.

The Puja and the Hidden Ball

On the tenth day, she worried about how she would perform the puja. Then, she started meditating on Dasha Mata, praying that if her mother-in-law went somewhere, she could perform the puja.

Dasha Mata heard her request. Due to Dasha Mata’s influence a thought came to mother-in-law’s mind. She decided to go to their fields. She told her daughter-in-law, “I am going to the fields. Keep the food ready by the time I return. If I get late, then you come to the fields and give me food there.”

The daughter-in-law already wanted this to happen. She immediately agreed. As soon as the mother-in-law left the house, the daughter-in-law took a bath and properly completed the Dasha Mata puja. After that, she was about to take the puja offering (collected in a clay ball) to immerse in water in some nearby river when suddenly her mother-in-law returned. The daughter-in-law quickly hid the clay ball in a buttermilk pot.

The clay ball turns into a ball of gold

As soon as she arrived, the mother-in-law asked her daughter-in-law, “Why haven’t you brought food for me yet?” The daughter-in-law replied, “I washed my hair today. That’s why it took a little longer to cook. I will serve the food now. Please eat.” The mother-in-law’s anger subsided.

The mother in law sat in the kitchen to have food. At the same time her son also arrived. He also sat down to eat with his mother. As the mother-in-law was about to get up after eating, her son said, “I want to drink buttermilk too.” The mother-in-law told her daughter-in-law to give her husband the buttermilk. The daughter-in-law said, “I am inside the kitchen; you give it to him.” The mother-in-law went to get the buttermilk herself.

The Mother-in-law’s Change of Heart

But as soon as she picked up the buttermilk pot, she heard something moving inside. The mother-in-law put her hand into the pot and found a large golden ball. With great surprise, the mother-in-law asked her daughter-in-law, “What is this? Tell me right now, or else I will punish you!” The daughter-in-law said, “I don’t know. Only Dasha Mata knows. I secretly took the thread for Dasha Mata’s fast and secretly performed the puja. You came back suddenly. Therefore, I couldn’t go to immerse the puja offering into the water. Out of your fear, I hid the offering in this pot. Dasha Mata turned the offering into gold. Now what should I do?”

The mother-in-law hugged her daughter-in-law. She said, “Now I will also observe the fast with you and properly perform the puja of Dasha Mata.

O Dasha Mata just like you blessed sister in law and her mother in law, similarly please bless all your devotees.

Teachings

  • Honesty and devotion always bear sweet fruit.
  • One should act with patience and wisdom even in adverse circumstances.
  • God’s grace is always upon his devotees.

Chalisa Sangrah (चालीसा संग्रह)

Aarti Sangrah (आरती संग्रह)

Vrat Katha Sangrah (व्रत कथा संग्रह)

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *