Dasha Mata Vrat Katha 7 | Dasha Mata ki Kahani 7 | Dasha Mata ki satvi Kahani

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एक ब्राह्मणी की कहानी

एक गांव में एक ब्राह्मणी रहती थी। उसके एक लड़का था। उसका नाम विनोद था। एक दिन ब्राह्मणी अपने बेटे से बोली, “बेटा, कुछ काम करो। जिससे अपना जीवन निर्वाह हो।” तब विनोद ने गांव वालों की गाय चराने का काम शुरू किया।

विनोद को दशामाता का गंडा प्राप्त होना

एक दिन विनोद गायों को पानी पिलाने घाट पर ले गया। वहाँ कुछ स्त्रियाँ स्नान करके दशामाता के गंडे ले रही थीं। उनके पास एक गंडा अधिक था। उन स्त्रियों ने विनोद से पूछा कि तुम कौन से वर्ण के हो? विनोद ने कहा कि वह ब्राह्मण है, पर कोई काम न मिलने के कारण गायें चराता है।

उन स्त्रियों ने विनोद को एक गंडा देकर कहा कि, “तुम इसे घर ले जाकर अपनी माता को देना, और उनसे कहना कि इस गंडे का पूजन और व्रत करें। हम लोग तुम्हें पूजा सामग्री भी देते हैं। वह भी ले जाकर अपनी माता को देना।”

लड़के ने गंडा ले लिया। लड़का पूजा सामग्री को अपनी गठरी में बांधकर घर ले गया। लड़के ने सब बात ब्राह्मणी को बताकर सारा सामान उसे दे दिया। ब्राह्मणी ने प्रेमपूर्वक गंडे को माथे से लगाया। उसी दिन से वह व्रत करने लगी। नौ दिन कथा कहानी कहती रही।

दशामाता की कृपा

दसवें दिन उसने गंडे के पूजन की तैयारी की। वह घर के बाहर लिपाई कर रही थी। तभी वहाँ एक वृद्ध गरीब स्त्री आई। गरीब स्त्री ने आकर पूछा कि, “बहन, तुम क्या कर रही हो?” ब्राह्मणी ने जवाब दिया कि आज मेरे घर में दशा माता का पूजन है। गरीब स्त्री ने ब्राह्मणी से पानी पिलाने को कहा। ब्राह्मणी बोली कि, “तुम ज़रा ठहरो, मैं कटोरी ढूँढ़ लाऊँ। फिर तुमको पानी पिलाऊँगी।” जब ब्राह्मणी कटोरी लेने अंदर गई, तब उस गरीब स्त्री ने ब्राह्मणी के घर के बाहर एक सोने का घड़ा रखा। फिर वह अंतर्ध्यान हो गई। वह गरीब स्त्री कोई और नहीं, बल्कि दशामाता ही थी।

ब्राह्मणी कटोरी लेकर जैसे ही बाहर आई तो वहाँ सोने का घड़ा देखकर घबरा गई। उसने सोचा कि सोने का घड़ा कहाँ से आ गया? कहीं मुझ पर चोरी का इल्ज़ाम न लग जाए। इसी चिंता में ब्राह्मणी उस गरीब स्त्री की खोज में बाहर निकली। तब तक उसका लड़का भी आ गया। ब्राह्मणी ने सारी बात अपने बेटे को बताई। बेटा बोला कि वह तो दशामाता थीं। उन्होंने सोने का घड़ा तुमको दे दिया है। अगर अबकी बार वे फिर आए, तो उनका अच्छी तरह स्वागत करना।

फिर ब्राह्मणी नदी में नहाने चली गई। जब वह नदी में नहाकर आई तो किनारे पर उसे सोने का भरा हुआ घड़ा दिखाई दिया और उत्तम वस्त्र भी पास ही रखे थे। उसने उन वस्त्रों को पहन लिया और घड़ा हाथ में लेकर घर की ओर जाने लगी। तभी चार कहार डोली लिए आ पहुँचे, और ब्राह्मणी से बोले कि यह डोली तुम्हारे लिए आई है। इसमें बैठकर घर चलो। जब वह घर पहुँचीं तो देखती है कि, उसकी टूटी-फूटी झोपड़ी की जगह एक बड़ा महल खड़ा था।

ब्राह्मणी ने महल के भीतर श्रद्धा और भक्तिपूर्वक दशामाता के गंडे की पूजा की। फिर हाथ जोड़कर उसने दशा माता से वरदान माँगा, “मेरे लड़के का विवाह हो जाए।” कुछ दिनों बाद लड़के का विवाह हो गया। बहुत ही सुशील बहू घर में आई। तब ब्राह्मणी ने दशा माता से दूसरा वर माँगा। उसने माता से वर माँगा कि, उसके एक पोता हो जाए। कुछ दिनों बाद बुढ़िया के लड़के को एक बेटा भी हो गया।

ब्राह्मणी की मृत्यु और बहू की परीक्षा

एक दिन ब्राह्मणी ने बहू को समझाया कि, मेरी यह सब संपत्ति दशामाता की दी हुई है। उन्हीं की कृपा से तुम भी इस घर में आई हो। यदि मैं मर जाऊँ और कभी एक गरीब स्त्री तुम्हारे घर आए तो उसका विनयपूर्वक स्वागत करना। यदि उसकी नाक बहती हो तो उसे अपने आँचल से पोंछना। जब कभी दशामाता के गंडे पड़े तब उनको अवश्य लेना और श्रद्धा पूर्वक उनकी पूजा करना। जब कभी तुम पर कोई संकट आ पड़े तब सुहागिनें न्यौतना। दशा माता की कृपा से तुम्हारी सभी इच्छाएँ पूरी होंगी।

कुछ दिनों बाद बुढ़िया की मृत्यु हो गई। तब दशामाता ने सोचा कि चलकर देखना चाहिए कि अब बहू सास के वचनों का पालन करती है या नहीं। अब दशामाता एक बूढ़ी भिखारी का वेश धारण कर उनके घर गई। उन्हें देखते ही बहू उठकर खड़ी हो गई। पांव छुए और दंडवत प्रणाम किया। अपने बालक को उनकी गोदी में डाल दिया। बहू की ऐसी श्रद्धा भक्ति देखकर, दशा माता ने बहू को आशीर्वाद दिया। दशा माता बोली कि, “तेरी धर्मबुद्धि हो। भगवान सदैव तेरा भला करेंगे। तेरा भंडार भरपूर रहेगा। कभी किसी भी बात की चिंता तुझे नहीं रहेगी। जो इच्छा करेगी सो फल पाएगी।”

हे दशामाता जैसी कृपादृष्टि आपने ब्राह्मणी और उसकी बहू पर की ,वैसी ही सब भक्तों पर करना।

सीखें

  • ईमानदारी और परोपकार का फल मीठा होता है।
  • भगवान की कृपा से जीवन में सफलता मिलती है।
  • गरीबों की मदद करना पुण्य का काम है।
  • सच्ची भक्ति और श्रद्धा से भगवान प्रसन्न होते हैं।
  • आपके कर्म आपके भविष्य को निर्धारित करते हैं।

दशा माता की पहली कहानी

दशा माता की दूसरी कहानी

दशा माता की तीसरी कहानी

दशा माता की चौथी कहानी

दशा माता की पाँचवी कहानी

दशा माता की छठी कहानी

दशा माता की सातवीं कहानी

दशा माता की आठवीं कहानी

दशा माता की नवी कहानी

Chalisa Sangrah (चालीसा संग्रह)

Aarti Sangrah (आरती संग्रह)

Vrat Katha Sangrah (व्रत कथा संग्रह)

The Story of a Brahmin Woman

In a village, there lived a Brahmin woman. She had a son named Vinod. One day, the Brahmin woman told her son, “Son, do some work to support our livelihood.” Then Vinod started working as a cowherd for the villagers.

Vinod getting Dasha Maata Ganda

One day, Vinod took the cows to a nearby river ghat to give them water to drink. On the river ghat, some women were taking ganda of Dasha Mata after bathing. They had one extra Ganda. The women asked Vinod about his caste. Vinod said he was a Brahmin, but worked as a cowherd as he is not getting any other work.

The women gave Vinod one ganda, saying, “Take this home and give it to your mother. Tell her to worship it and observe a fast. We will also give you puja materials; take them to your mother as well.” The boy took the ganda. He tied the puja materials in his bundle and took them home. The boy told everything to the Brahmin woman and gave her all the items. The Brahmin woman devotionally touched the ganda to her forehead. From that day, she started fasting. She narrated Dasha Mata stories for nine days.

The Grace of Dashamaata

On the tenth day, she prepared for the ganda’s worship. She was plastering the outside of the house when an old, poor woman came. The poor woman asked, “Sister, what are you doing?” The Brahmin woman replied that she was performing Dasha Maata’s puja. The poor woman asked for her for some driking water. The Brahmin woman said, “Wait a moment; I’ll find a bowl and then give you water.”

When the Brahmin woman went inside to get a bowl, the poor woman placed a golden pot outside the Brahmin woman’s house. Then she disappeared. That poor woman was none other than Dasha Maata. When the Brahmin woman came out with the bowl, she was startled to see the golden pot. She wondered where the golden pot had come from, fearing accusations of theft. Worried, she went out looking for the poor woman.

By then, her son had also arrived. The Brahmin woman told her son everything. Her son said it was Dasha Maata herself, who had given her the golden pot. He advised his mother to welcome Dasha Maata warmly if she came again.

Then the Brahmin woman went to bathe in the river. When she came back from bathing, she saw a full golden pot and precious clothes on the riverbank. She put on the clothes and took the pot, heading home. Then four palanquin bearers arrived with a palanquin, and told the Brahmin woman that the palanquin was for her. She went home in it.

When she arrived home, she saw that her dilapidated old hut had been replaced by a large palace. The Brahmin woman worshipped Dasha Mata’s idol inside the palace with devotion. She prayed to Dasha Maata, asking for her son’s marriage. A few days later, her son got married, and a very virtuous daughter-in-law joined the family. Then the Brahmin woman asked Dasha Maata for another boon—a grandson. A few days later, a grandson was born.

The Brahmin Woman’s Death and the Daughter-in-Law’s Test

One day, the Brahmin woman told her daughter-in-law that all her wealth was a gift from Dasha Maata. She added that if she died and a poor woman ever came to their home, then the daughter in law should welcome her respectfully. If the woman’s nose was running, she should wipe it with her dupatta. Whenever she found idols of Dasha Maata, she should take and worship them devoutly. During any crisis, she should invite married women. Dasha Maata’s grace would fulfill all her desires.

A few days later, the old woman died. Dasha Maata thought that she should go and see if the daughter-in-law followed her mother-in-law’s words. Dasha Maata went to their house disguised as an old beggar woman. As soon as the daughter-in-law saw her, she stood up, touched her feet, and bowed in front of her. She put her child in the beggar woman’s lap.

Seeing the daughter-in-law’s devotion, Dasha Maata blessed her. Dasha Maata said, “May you have righteous intellect. God will always do good to you. You will always remain prosperous. You will never worry about anything. Your wishes will be fulfilled.”

May Dasha Maata bless all her devotees like she blessed brahmin woman and her daughter in law.

Lessons

  • Honesty and charity bear sweet fruit.
  • Success in life comes from God’s grace.
  • Helping the poor is a virtuous act.
  • True devotion and faith pleases God.
  • Your actions determine your future.

Chalisa Sangrah (चालीसा संग्रह)

Aarti Sangrah (आरती संग्रह)

Vrat Katha Sangrah (व्रत कथा संग्रह)

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