Gangaur Ki Kahani (Gangaur ki Katha)

गणगौर की कथा – Lord Shiva and Parvati Story
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गणगौर की कथा

भगवान शिव और माता पार्वती की यात्रा

🌸 🙏 🌺
🌼

चैत्र का महीना

चैत्र का महीना आया। पार्वती जी को भाभी के उजर्णे के लिए पीहर जाना था। वो महादेव जी के साथ चली।

🐂
👥

लोक व्यवहार कैसा होता है

पहली स्थिति: महादेव जी नंदी पर बैठे और पार्वती माता पैदल चलने लगी।

💬 “देखो आदमी तो सवारी पर बैठा है, और औरत को पैदल चला रहा है।”

दूसरी स्थिति: पार्वती माता नंदी पर बैठीं और महादेव जी पैदल चले।

💬 “देखो औरत तो सवारी पर बैठी हैं, और पति पैदल चल रहा है।”

तीसरी स्थिति: दोनों पैदल चलने लगे।

💬 “देखो वाहन होते हुए भी दोनों पैदल चल रहे हैं।”

चौथी स्थिति: दोनों नंदी पर बैठ गए।

💬 “देखो दोनों कैसे छोटे से जीव पर एक साथ बैठे हुए हैं।”

🌟 “पार्वती यही संसार है। यहाँ ऐसे ही होता है।” 🌟

🤰

प्रसव पीड़ा देखकर पार्वती माता का मन बैचेन होना

🐄

गाय का कष्ट

इसके बछड़ा होने वाला है

🐴

घोड़ी का कष्ट

इसके बच्चा होने वाला है

👑

रानी का कष्ट

रानी के पुत्र होने वाला है

पार्वती जी बोलीं: “बच्चे के लिए इतना कष्ट मुझसे सहन नहीं होगा। आप मेरे गांठ दे देवो।”
महादेव जी को गांठ देनी पड़ी। 🙏

🪔

पार्वती माता का गणगौर पूजन

महादेव जी ससुराल पहुंचे। पीपल के पेड़ के नीचे वास् किया। पार्वती माता पीहर में सहेलियों में मग्न हो गयी।

🌺 गणगौर का दिन 🌺

सवेरे से ही स्त्रियां पूजा करने आने लगीं। पार्वतीजी सभी को सुहाग बांटने लगी।

दोपहर के समय बनियों की औरतें 16 श्रृंगार करके पूजा करने आई।

✨ अमर सुहाग का वरदान ✨

  • 💍 चिट्ठी उँगली जल में खोलें
  • 👁️ नैनो का सूरमा निकालो
  • 🔴 माँग से सिंदूर निकालो
  • 🎨 टिकी मैं से रोली निकालें
  • 🙏 सभी स्त्रियों को अमर सुहाग दे दो
🍽️

भोजन की कथा

महादेव जी जीमने बैठे: जितना खाना बनाया गया था, सब जिम गए। 🍛

पार्वती जी जीमने बैठीं:

माँ: “बेटी मैं थोड़ा और भोजन बना देती हूँ।”

पार्वती: “माँ मैं तो बेटी हूँ। कुछ भी खा लूंगी।”

पार्वती जी ने जला बाटया और बथुए की पिंडी खाकर लोटा भर पानी पी लिया। 🥤

🌳 पीपल के पेड़ के नीचे 🌳

पार्वती जी को नींद आ गई। महादेव जी ने पार्वती जी के पेट की ढकनी खोली।

देखा: जला बाटया और बथुए की पिंडी थोड़े से पानी के साथ पड़ी थी। 😔

जब पार्वतीजी जागी, तो महादेव जी ने पूछा: “पार्वती, आपने क्या क्या खाया?”

पार्वती जी: “महादेव जी, जो आपने खाया है वो ही हमने खाया।”

महादेव जी बोले: “पार्वती जी सच बोलिए। देखो पार्वती, तुम्हारे पेट में जला बाटया और बथुए की पिंडी के अलावा थोड़ा सा जल है।”

😠 पार्वतीजी बहुत नाराज हुई। 😠

🙏

कथा का सार

✨ संसार में लोग हर स्थिति में कुछ न कुछ कहेंगे

💖 माता-पिता का त्याग और बेटियों का समर्पण

🌟 गणगौर व्रत का महत्व और सुहाग का वरदान

🌸 जय माता पार्वती 🌸

🕉️ हर हर महादेव 🕉️

गणगौर की कथा – एक पवित्र कहानी

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