कामिका एकादशी
श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पवित्र एकादशी
कामिका एकादशी का परिचय
कामिका एकादशी का वर्णन पद्म पुराण में मिलता है। यह एकादशी श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आती है। आम तौर पर श्रावण मास अँग्रेजी कलेंडर के अनुसार जुलाई-अगस्त महीने में पड़ता है।
क्या आप जानते हैं?
कामिका एकादशी के स्मरण मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। यह एकादशी सभी पापों को हरने वाली मानी जाती है।
युधिष्ठिर और श्री कृष्ण का संवाद
एक बार युधिष्ठिर ने श्री कृष्ण से पूछा की, “श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में, कौन से एकादशी आती है? उसका वर्णन कीजिये।”
श्री कृष्ण बोले की, “मैं तुम्हें एक कथा सुनता हूँ। जो ब्रह्मा जी ने नारद जी के पूछने पर कही थी।”
ब्रह्मा जी और नारद जी का संवाद
नारद जी ने ब्रह्मा जी से पूछा कि, “हे भगवन, श्रावण के कृष्ण पक्ष में कौन सी एकादशी होती है? और उसका क्या नाम है? और उसका क्या पुण्य होता है? यह सब बताइए।”
ब्रह्मा जी बोले की, “हे नारद, मैं संपूर्ण लोकों के हित को ध्यान में रखते हुए, कामिका एकादशी का वर्णन तुम से कहता हूँ।”
कामिका एकादशी के लाभ
इस पवित्र व्रत से मिलने वाले अद्भुत फल
पूजा का महत्व
इस दिन श्रीधर, विष्णु, माधव, और मधुसूदन आदि नामों से भगवान का पूजन करना चाहिए।
इस एकादशी को भगवान श्रीकृष्ण के पूजन से जो फल मिलता है, वह गंगा, काशी, नैमिषारण्य तथा पुष्कर क्षेत्र में भी सुलभ नहीं है।
अद्भुत फल
सिंह राशि में बृहस्पति के होने पर तथा व्यातिपात और दंड योग में गोदावरी स्नान से जिस फल की प्राप्ति होती है, वही फल कामिका एकादशी को भगवान श्रीकृष्ण के पूजन से भी मिलता है।
समुद्र और वन सहित समूची पृथ्वी का दान करने पर जो फल मिलता है, वही फल कामिका एकादशी का व्रत करने पर मिलता है।
गौ दान का फल
जो ब्यायी हुई गाय को दान करने से फल मिलता है, वैसा ही फल कामिका एकादशी के व्रत करने वालों को मिलता है।
देवताओं की पूजा
जो मनुष्य श्रावण मास में भगवान श्री धर का पूजन करता है, उसके द्वारा गंधर्वों और नागों सहित सभी देवताओं की पूजा हो जाती है।
मोक्ष प्राप्ति का मार्ग
पाप रूपी संसार समुद्र से उद्धार पाने के लिए कामिका एकादशी का व्रत उत्तम है। कामिका का व्रत करने वाला मनुष्य रात्रि में जागरण करके, न तो कभी भयंकर यमराज के दर्शन करता है, न कभी दुर्गति में ही पड़ता है।
तुलसी की महिमा
यहाँ पर ब्रह्मा जी ने तुलसी की महिमा का भी वर्णन किया है।
बहूमूल्य लालमणि, मोती और मूंगे आदि से पूजित होने पर भी भगवान विष्णु वैसे संतुष्ट नहीं होते जैसे साधारण से दिखने वाले तुलसी दल से पूजित होने पर होते हैं।
जिसने तुलसी की मंजरी से श्रीकेशव का पूजन कर लिया है, उसके जन्मभर का पाप निश्चय ही नष्ट हो जाता है।
तुलसी के लाभ
तुलसी का दर्शन करने पर सारे पाप नष्ट होते हैं।
स्पर्श करने पर शरीर पवित्र होता है।
प्रणाम करने पर रोगों का निवारण होता है।
जल से सींचने पर यमराज को भी भय पहुंचाती है।
आरोपित करने पर भगवान श्रीकृष्ण के समीप ले जाती है।
भगवान के चरणों में चढ़ाने पर मोक्ष प्रदान करती है।
उन तुलसी देवी को नमस्कार है।
दीप दान का महत्व
एकादशी को दिन रात दीप दान करने से बहुत पुण्य मिलता है।
एकादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के सामने दीपक जलाने से, स्वर्ग लोक में पितृ भी अमृतपान से तृप्त हो जाते हैं।
घी अथवा तिल के तेल से, भगवान के सामने दीपक जलाकर, मनुष्य देह त्यागने के पश्चात, करोड़ों दीपकों से पूजित हो स्वर्गलोक में जाता है।
श्री कृष्ण का उपदेश
इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर के सामने कामिका एकादशी के महत्त्व का वर्णन किया।
फिर भगवान श्रीकृष्ण बोले की कामिका एकादशी सभी पापों को हरने वाली है। अतः इसका व्रत सभी को करना चाहिए।
यह महान पुण्य फल देने वाली है। इसका व्रत करने से मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर, श्री विष्णु लोक को जाता है।
