मोहिनी एकादशी व्रत कथा
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का महत्व और धृष्टबुद्धि की कहानी
युधिष्ठिर का प्रश्न
एक बार युधिष्ठिर जी ने, भगवान श्रीकृष्ण से, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली, मोहिनी एकादशी के बारे में वर्णन करने के लिए प्रार्थना की।
भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर जी को बताया की, पूर्वकाल में श्री रामचन्द्रजी ने महर्षि वशिष्ठ से इसी एकादशी के बारे में पूछा था।
महर्षि वशिष्ठ का उपदेश
वशिष्ट जी श्री राम से बोले, “मनुष्य तुम्हारा नाम लेने से ही सब पापों से शुद्ध हो जाता है। फिर भी लोगों के हित की इच्छा से मैं इस उत्तम व्रत का वर्णन करता हूँ।”
इसके व्रत के प्रभाव से मनुष्य मोहजाल तथा पातक समूह से छुटकारा पा जाते हैं।
भद्रावती नगरी
सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नाम की एक नगरी थी। वहाँ चंद्रवंश में उत्पन्न हुआ धृतिमान नामक राजा राज्य करता था।
उसी नगर में धनपाल नमक एक वैश्य रहता था जो बहुत धनी था। वह सदा पुण्यकर्म करता, दूसरों के लिए कुआं, मठ, बगीचा, घर इत्यादि बनवाया करता था।
भगवान विष्णु की भक्ति में उसका बहुत प्रेम था। वह सदा शांत रहता था।
धनपाल के पुत्र
उसके पांच पुत्र थे सुमना, ध्युतिमान, मेघावी, सुकृत, एवं धृष्टबुद्धि। सबसे छोटा धृष्टबुद्धि हमेशा पाप कर्मों में ही संलग्न रहता था। उसे जुए आदि दुर्व्यसनों की भी आसक्ति थी।
एक बार उसकी बुरी आदतों से दुखी होकर, पिता ने उसे घर से निकाल दिया। और सगे संबंधियों ने भी उसका परित्याग कर दिया।
अब वह शोक में डूबा इधर उधर भटकने लगा।
महर्षि कौण्डिन्य का आश्रम
एक बार किसी पुण्य के उदय होने से, वो महर्षि कौण्डिन्य के आश्रम पर जा पहुंचा। वैशाख का महीना था। धृष्टबुद्धि मुनिवर के पास गया। और उनसे निवेदन किया कि, वे उसे कोई ऐसा व्रत बताएं, जिसके पुण्य से उसकी मुक्ति हो।
महर्षि कौण्डिन्य ने उसे मोहिनी एकादशी का उपवास करने के लिए कहा। वे बोले कि, “इस व्रत को करने से, पर्वत जैसे बड़े महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।”
धृष्टबुद्धि की मुक्ति
यह सुनकर धृष्टबुद्धि बहुत प्रसन्न हुआ। उसने ऋषि के उपदेशानुसार, मोहिनी एकादशी का व्रत किया। इसके फलस्वरूप वह निष्पाप हो गया। और श्री हरि विष्णु धाम को चला गया।
यह व्रत बहुत ही उत्तम है। इसके पढ़ने और सुनने से 1000 गोदान का फल मिलता है।
मोहिनी एकादशी का महत्व
इस पवित्र व्रत के माध्यम से मनुष्य अपने सभी पापों से मुक्ति पा सकता है और भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त कर सकता है।
