Sheetla Mata ki Katha 2 | Sheetla Mata ki Kahani 2 | Sheetla Mata Vrat Katha 2

Hindi

राजा का बेटा और काछी पुत्र की कथा

राजकुमार और काछी पुत्र को चेचक की बीमारी

एक बार एक राजा के इकलौते पुत्र की शीतला (चेचक) निकली। राज्य में एक काछी पुत्र को भी शीतला निकली। काछी परिवार बहुत गरीब था। किन्तु माँ भगवती का उपासक था। वह धार्मिक दृष्टि से सभी नियमों का पालन करता था। प्रतिदिन नियमपूर्वक भगवती की पूजा होती थी। नमक खाने पर पाबंदी थी। सब्जी में छौंक नहीं लगता था। और न कोई वस्तु भूनी -तला जाती थी। गरम वस्तु न वह खाता था, न अपने बालक को ही खिलाता था। इस प्रकार काछी पुत्र शीघ्र ठीक हो गया।

राजा का प्रयास

उधर जब से राजा के लड़के को शीतला का प्रकोप हुआ था, तब से उसने भगवती के मण्डप में ‘शतचण्डी’ का पाठ शुरू करवा दिया था | रोज हवन व बलिदान होते थे | राजपुरोहित सदा भगवती के पूजन में मग्न रहते | राजमहल में रोज कड़ाही चढ़ती, विविध प्रकार के गर्म स्वादिष्ट भोजन बनते | इसका परिणाम यह होता कि उन लजीज भोजन की गंध से, राजकुमार का मन मचल उठता | वह भोजन के लिए ज़िद करता | एक तो राज पुत्र और दूसरा इकलौता, इस कारण उसकी अनुचित ज़िद भी पूरी कर दी जाती |

राजा के घर में इस प्रकार की दिनचर्या से शीतला का कोप घटने के बजाय बढ़ने लगा | शीतला के साथ-साथ राजा के लड़के के बड़े-बड़े फोड़े भी निकलने लगे, जिनमें खुजली व जलन अधिक होती थी | शीतला की शान्ति के लिए राजा जितने भी उपाय करता वह सब व्यर्थ हो जाते | एक दिन राजा के गुप्तचरों ने उसे बताया कि काछी-पुत्र को भी शीतला निकली थी, पर वह बिल्कुल ठीक हो गया है | यह जानकर राजा सोच में पड़ गया। कि मैं शीतला की इतनी सेवा कर रहा हूँ, पूजा व अनुष्ठान में कोई कमी नहीं है, पर मेरा पुत्र अधिक रोगी होता जा रहा है। जबकि काछी-पुत्र बिना सेवा-पूजा के ही ठीक हो गया |

देवी का दर्शन

इसी सोच में उसे नींद आ गई | श्वेत वस्त्र धारिणी माँ भगवती ने उसे स्वप्न में दर्शन देकर कहा। हे राजन् ! मैं तुम्हारी सेवा-अर्चना से प्रसन्न हूँ। इसलिए आज भी तुम्हारा पुत्र जीवित है | इसके ठीक न होने का कारण यह है कि, तुमने शीतला के समय, पालन करने योग्य नियमों का उल्लंघन किया है | जबकि ऐसे हाल में नमक का प्रयोग बन्द करना चाहिये | नमक से रोगी के फोड़ों में खुजली होती है |

घर की सब्जियों में छोंक नहीं लगाना चाहिये ,क्योंकि इसकी गंध से रोगी का मन उन वस्तुओं को खाने के लिए ललचाता है | रोगी को किसी के पास आना-जाना भी नहीं चाहिए। क्योंकि यह रोग दूसरों को भी होने का भय रहता है।

हे राजा, इस नियमों का पालन कर, तेरा पुत्र शीघ्र ही ठीक हो जाएगा। विधि समझाकर देवी अन्तर्ध्यान हो गई | प्रात: ही राजा ने देवी की आज्ञानुसार सभी कार्यों की व्यवस्था कर दी | इससे राजकुमार को सेहत पर अनुकूल प्रभाव पड़ा, और वह शीघ्र ठीक हो गया |

सीखें

  • सही विधि का पालन महत्वपूर्ण है।
  • गरीबी में भी धर्म का पालन संभव है।
  • रोग के समय सादगी आवश्यक है।

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