Sheetla Mata ki Katha 1 | Sheetla Mata ki Kahani 1 | Sheetla Mata Vrat Katha 1

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कुम्हार की कहानी

शीतला माता को गरम खाने के भोग का परिणाम

चैत्र का महीना आया। होली के छह दिन बाद शीतला सप्तमी आई। सभी लोग कहने लगे “माता आई- माता आई”। किसी ने हलुआ बनाया, किसी ने पूड़ी बनाई। माता के गर्म खाने का भोग लगाया। माता के अंग-अंग में आग जलने लगी।

शीतला माता का कुम्हार पर प्रसन्न होना

माता दौड़ी-दौड़ी कुम्हार के पास गयी। कुम्हार को कहा ‘मेरा अंग-अंग जल रहा है, मुझे ठंडी मिट्टी में लेटने दो।’ ठंडी मिट्टी में लेटने से माता को थोड़ी ठंडक मिली, और बोली कुम्हार मुझे भूख लगी है। कुम्हार ने रात की ठंडी रोटी राब के साथ माता को खाने को दी, इससे माता को ठंडक महसूस हुई। माता के जो अंग-अंग जल रहे थे, वह अब ठीक होने लगे। इससे माता कुम्हार पर प्रसन्न हुई।

नगर का विनाश और कुम्हार का उद्धार

माता ने कहा सारे नगर में हाहाकार होगा, केवल तेरा घर बचेगा। सारा नगर त्राहि-त्राहि करने लगा, और कुम्हार का घर बच गया। गाँव वाले कहने लगे “कुम्हार तूने क्या जादू किया, जिससे सारा नगर नष्ट हो गया और तेरा घर बच गया?” कुम्हार ने कहा “मैंने कोई जादू टोना नहीं किया, मैंने तो बस माता को शीतल किया है।”

तुम सब लोगों ने गर्म भोजन कराया, तो माता के अंग-अंग में फफोले हो गये थे। इसी कारण माता को कोप हुआ और नगर में त्राहि-त्राहि मची।

लोगों ने पूछा “माता कहाँ है?” तो कुम्हार कहने लगा “माता नीम के नीचे ठंडी छाया में बैठी है।” गाँव वाले माता के पास गये और विनती करने लगे। तो माता बोली “तुम सभी ने मुझे गर्म भोजन करवाया, जिससे मेरी जीभ पर छाले हो गए। कुम्हार ने मुझे ठंडा भोजन करवाया। जिससे मुझे ठंडक मिली। इसी कारण सारा नगर नष्ट हो गया।” और कुम्हार का घर मेरी कृपा से महल बन गया।

माता की शिक्षा और नगर का उद्धार

लोगों ने पूछा “माता, अब हम क्या करें?” माता बोली “होली के सात दिन बाद शीतला सप्तमी आती है।” उस दिन सभी गाँववासी स्त्रियाँ, छठ के दिन बनाए ठंडे खाने से मेरी पूजा करें व भोग लगाएँ।

बारह महीने बाद वापस शीतला सप्तमी आई। राजा ने सारे नगर में ढिंढोरा पिटवा दिया कि, होली के बाद सात दिनों तक सब माता का अगता रखें। याने कोई सिर नहीं धोये, सिलना, कूटना, पीसना नहीं करें। छठ के बनाये भोजन से माता की सप्तमी को पूजा करें।

लोगों ने जैसा कहा वैसा ही किया। माता प्रसन्न हुई, सारे नगर में आनन्द हुआ।

हे शीतला माता जैसे सारे नगर वासियों को क्षमा किया और उन पर प्रसन्न हुई। वैसे सब पर प्रसन्न रहना, भूल-चूक माफ करना। जय शीतला माता की जय।Shee

शीतला माता की कथा से शिक्षाएँ

  • इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है की अज्ञानता से हानि ही होती है। नगरवासियों ने अज्ञानतावश माता को गर्म भोजन चढ़ाया। बिना सोचे समझे कोई भी कार्य करना हानिकारक है।
  • इस कहानी से हमें यह भी शिक्षा मिलती है की समाज में अनुशासन बहुत आवश्यक है। राजा ने नगर में घोषणा करवाई कि शीतला सप्तमी के नियमों का पालन किया जाए। सभी नगर वासियों ने राजा के आदेश का पालन किया । जिसके कारण सम्पूर्ण नगर इस त्रासदी से मुक्त हो पाया।
  • हमें अपने अंदर समस्या का समाधान खोजने की प्रवत्ति विकसित करनी चाहिए , न की शिकायत करते रहने की। सारा नगर सिर्फ शिकायत कर रहा था की माता क्रोध में है। कुम्हार ने सिर्फ शिकायत ही नहीं करी। उसनें कारण का एक सरल निवारण खोजा और उस पर अमल किया।

Chalisa Sangrah (चालीसा संग्रह)

Aarti Sangrah (आरती संग्रह)

Vrat Katha Sangrah (व्रत कथा संग्रह)

The Story of a Potter

The consequences of offering hot food to Sheetala Mata

The month of Chaitra arrived. Six days after Holi, Sheetala Saptami came. Everyone started saying, “Mother has arrived! Mother has arrived!” Some made halwa, some made puris. Hot food was offered to the Mother. The Mother felt a burning sensation in her body.

Mother’s Meeting with the Potter

The Mother rushed to the potter. She said, ‘My whole body is burning, let me lie in the cool earth.’

Lying in the cool earth gave the Mother some relief, and she said to the potter, ‘I am hungry.’ The potter gave the Mother cold roti with raab (a thin porridge) left over from the previous night. This gave the Mother relief. The burning sensation in her body started to subside. The Mother was pleased with the potter.

Destruction of the City and Salvation of the Potter

The Mother said to the potter that there would be chaos in the entire city, only your house would be saved. The entire city cried out in distress, but the potter’s house was spared. The villagers said, “Potter, what magic did you do, that the entire city was destroyed, but your house was saved?” The potter said, “I did no magic, I only cooled the Mother.”

You all offered hot food, causing blisters on the Mother’s body. This angered Mother, and chaos erupted in the city.

People asked, “Where is the Mother?” The potter replied, “The Mother is sitting in the cool shade under the neem tree.” The villagers went to Mother and pleaded with her. The Mother said, “You all fed me hot food, causing blisters on my tongue. The potter fed me cool food, giving me relief. That is why the whole city was destroyed.” And the potter’s house, by my grace, became a palace.

Mother’s Teachings and the City’s Salvation

People asked, “Mother, what should we do now?” The Mother said, “Sheetala Saptami comes seven days after Holi.” On that day, all the women of the village should worship me, with the cold food prepared on the sixth day after Holi and offer it as Prasad.

After twelve months, Sheetala Saptami returned. The king made announcement throughout the city, that for seven days after Holi, everyone should observe ‘Agta’ (abstinence), meaning no one should wash their hair, sew, pound, or grind. They should worship the Mother on Saptami with the food prepared on the sixth day. The people did as instructed. The Mother was pleased, and joy filled the city.

May Sheetala Mata forgive everyone just like she forgave the city dwellers. May Sheetala Mata bless everyone just like she blessed the people of the city. May she always be pleased and forgive our mistakes. Sheetala Mata ki Jai!

Teachings

  • This story educates us that ignorance only leads to harm. The city dwellers, out of ignorance, offered hot food to the goddess. Performing any task without thinking can be harmful.
  • This story also teaches us that discipline is essential in society. The king announced in the city that the rules of Sheetala Saptami should be followed. All the city dwellers obeyed the king’s orders, and as a result, the entire city was saved from this tragedy.
  • We should develop the habit of finding solutions to problems , rather than just complaining. The entire city was just complaining that the goddess was angry. The potter, however, did not just complain; he found a simple solution to the problem and implemented it.

Chalisa Sangrah (चालीसा संग्रह)

Aarti Sangrah (आरती संग्रह)

Vrat Katha Sangrah (व्रत कथा संग्रह)

Watch the glorious Sheetala Mata Katha video. In this Sheetala Mata ki Kahani you will know the reason why only cold food is offered to Sheetala Mata?

Watch the beautiful rendition of Sheetla Mata Vrat katha

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