॥ भगवान बदरीनाथ आरती ॥
श्री बदरीनाथजी की आरती
Badrinath Ji Ki Aarti
जय जय श्री बदरीनाथ जयति योग ध्यानी
जय जय श्री बदरीनाथ जयति योग ध्यानी
जय जय श्री बदरीनाथ…
निर्गुण सगुण स्वरूप
निर्गुण सगुण स्वरूप, मेधवर्ण अति अनूप।
सेवत चरण सुरभूप, ज्ञानी विज्ञानी॥
जय जय श्री बदरीनाथ…
झलकत है शीश छत्र
झलकत है शीश छत्र, छवि अनूप अति विचित्र।
बरनत पावन चरित्र सकुचत बरबानी॥
जय जय श्री बदरीनाथ…
तिलक भाल अति विशाल
तिलक भाल अति विशाल, गल में मणि मुक्त-माल।
प्रनतपाल अति दयाल, सेवक सुखदानी॥
जय जय श्री बदरीनाथ…
कानन कुण्डल ललाम
कानन कुण्डल ललाम, मूरति सुखमा की धाम।
सुमिरत हों सिद्धि काम, कहत गुण बखानी॥
जय जय श्री बदरीनाथ…
गावत गुण शम्भु, शेष
गावत गुण शम्भु, शेष, इन्द्र, चन्द्र अरु दिनेश।
विनवत श्यामा हमेश जोरी जुगल पानी॥
जय जय श्री बदरीनाथ…
जय जय श्री बदरीनाथ जयति योग ध्यानी
आरती के लाभ
आध्यात्मिक उन्नति
बदरीनाथ जी की आरती का नियमित पाठ आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है।
मनोकामना पूर्ति
श्रद्धा और भक्ति से की गई आरती से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
शांति और सुख
आरती के पाठ से मन में शांति और जीवन में सुख की प्राप्ति होती है।
नकारात्मक ऊर्जा का नाश
आरती के माध्यम से घर और मन से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
