शिव चालीसा
दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान ॥
चौपाई
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥
अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे॥
मैना मातु की हवे दुलारी।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ।
या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा।
सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।
सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला।
जरत सुरासुर भए विहाला॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई।
कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी।
करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।
येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।
संकट से मोहि आन उबारो॥
मात-पिता भ्राता सब होई।
संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी।
आय हरहु मम संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदा हीं।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन।
मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।
शारद नारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमः शिवाय।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई।
ता पर होत है शम्भु सहाई॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी।
पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा जोई।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे।
ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।
ताके तन नहीं रहै कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे।
अन्त धाम शिवपुर में पावे॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥
दोहा
नित्त नेम कर प्रातः ही,
पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना,
पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि,
पूर्ण कीन कल्याण॥
Shiv Chalisa
Doha
Jay Ganesh Girija Suvan,
Mangal Mool Sujan।
Kahat Ayodhyadas Tum,
Dehu Abhay Vardaan॥
Chaupai
Jay Girija Pati Deen Dayala।
Sada Karat Santan Pratipala॥
Bhaal Chandrama Sohat Nikey।
Kaanana Kundal Naagaphani Key॥
Ang Gaur Shir Gang Bahaaye।
Mundamal Tan Kshaar Lagaaye॥
Vastr Khaal Baaghmbar Sohe।
Chhavi Ko Dekhi Naag Man Mohe॥
Maina Matu Ki Have Dulaari।
Baam Ang Sohat Chhavi Nyari॥
Kar Trishool Sohat Chhavi Bhaari।
Karat Sada Shatrun Kshayakaari॥
Nandi Ganesh Sohai Tahank Kaise।
Saagar Madhya Kamal Hai Jaise॥
Kartik Shyam Aur Ganraau।
Ya Chhavi Ko Kahi Jaat Na Kaau॥
Devan Jabahi Jaay Pukara।
Tab Hi Dukh Prabhu Aap Niwara॥
Kiya Upadrav Tarak Bhaari।
Devan Sab Mili Tumhin Juhaari॥
Turat Shadanan Aap Pathaayau।
Lavanimesh Mahan Maari Giraayau॥
Aap Jalandhar Asur Sanhaara।
Suyash Tumhar Vidit Sansaara॥
Tripurasur San Yudh Machaai।
Sabhin Kripa Kar Leen Bachaai॥
Kiya Tapihin Bhageerath Bhaari।
Purb Pratigya Taasu Puraari॥
Daanin Mahin Tum Sam Kou Naahi।
Sevak Stuti Karat Sadaahi॥
Ved Naam Mahima Tav Gaai।
Akath Anadi Bhed Nahin Paai॥
Prakati Uddh Mandhan Mein Jwaala।
Jarata Surasur Bhae Vihaala॥
Keenhi Daya Tahan Kari Sahaai।
Neelkanth Tab Naam Kahaai॥
Pujan Ramchandra Jab Keenha।
Jeet Ke Lanka Vibhishan Deenha॥
Sahas Kamal Mein Ho Rahe Dhaari।
Keenha Pariksha Tabahi Puraari॥
Ek Kamal Prabhu Rakhewu Joi।
Kamal Nayana Pujan Chahen Soi॥
Kathin Bhakti Dekhi Prabhu Shankar।
Bhae Prasann Die Ichchhit Var॥
Jay Jay Jay Anant Avinaashi।
Karat Krupa Sab Ke Ghatavaasi॥
Dusht Sakal Nit Mohi Sataavain।
Bhramat Rahon Mohi Chain Na Aavain॥
Traahi Traahi Main Nath Pukaaro।
Yehi Avasar Mohi Aan Ubaaro॥
Lai Trishool Shatrun Ko Maaro।
Sankat Se Mohi Aan Ubaaro॥
Maat-Pita Bhrata Sab Hoi।
Sankat Mein Poochat Nahin Koi॥
Swaami Ek Hai Aas Tumhaari।
Aay Harahu Mam Sankat Bhari॥
Dhan Nirdhan Ko Det Sada Hi।
Jo Koi Jaanche So Phal Paahi॥
Astuti Kehi Vidi Karain Tumhaari।
Kshamahu Naath Ab Chook Hamaari॥
Shankar Ho Sankat Ke Nashan।
Mangal Kaaran Vighn Vinaashan॥
Yogi Yati Muni Dhyaan Lagaavain।
Sharad Narad Shish Navaavain॥
Namo Namo Jay Namah Shivaya।
Sur Brahmaadik Paar Na Paaya॥
Jo Yeh Paath Kare Man Laai।
Ta Par Hot Hai Shambhu Sahaai॥
Riniyaan Jo Koi Ho Adhikaari।
Paath Kare So Paavan Haari॥
Putr Heen Kar Ichchha Joi।
Nischay Shiv Prasaad Te Hi Hoi॥
Pandit Trayodashi Ko Laave।
Dhyaan Poorvak Hom Karaave॥
Trayodashi Vrat Karai Hamesha।
Taake Tan Nahin Rahai Kalesha॥
Dhoop Deep Naivedya Chadhaave।
Shankar Sammukh Paath Sunaave॥
Janam Janam Ke Paap Nasaave।
Ant Dhaam Shivpur Mein Paave॥
Kahain Ayodhyadas Aas Tumhaari।
Jaani Sakal Dukh Harahu Hamaari॥
Doha
Nitt Nem Kar Praatahi Hee,
Paath Karoun Chalisa।
Tum Meri Manokamana,
Poorn Karo Jagdeesh॥
Magasar Chhati Hemant Rutu,
Samvat Chaussath Jaan।
Astuti Chalisa Shivahi,
Poorn Keen Kalyaan॥
शिव चालीसा (हिन्दी भावार्थ)
दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान।
अर्थ: मैं भगवान गणेश को, जो माता पार्वती के पुत्र हैं, प्रणाम करता हूं। वे ज्ञान और कल्याण के मूल हैं।
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान ॥
अर्थ: मैं अयोध्यादास आपसे प्रार्थना करता हूं कि आप मुझे अभय वरदान प्रदान करें।
चौपाई
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
अर्थ: हे गिरिजा (पार्वती) के पति, दीनों पर दया करने वाले भगवान शिव, आप सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।
भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥
अर्थ: भगवान शिव के माथे पर चंद्रमा सुंदर रूप से चमक रहा है। उनके कानों में नागफनी के कुंडल हैं।
अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥
अर्थ: भगवान शिव का शरीर गौरवर्ण का है और उनके सिर पर गंगा बह रही है। उन्होंने मुंडमाला पहनी हुई है और अपने शरीर पर भस्म लगाई हुई है।
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे॥
अर्थ: भगवान शिव ने बाघ की खाल का वस्त्र पहना हुआ है। उनकी छवि देखकर नाग भी मोहित हो जाते हैं।
मैना मातु की हवे दुलारी।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
अर्थ: माता मैना की प्रिय पुत्री पार्वतीजी आपके बाईं ओर सुशोभित हैं इनकी शोभा अत्यंत निराली और न्यारी है।
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥
अर्थ: भगवान शिव के हाथ में त्रिशूल शोभायमान है। वे सदैव अपने शत्रुओं का नाश करते हैं।
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
अर्थ: भगवान शिव के साथ नंदी और गणेशजी भी विराजमान हैं। वे समुद्र के बीच में कमल की तरह दिखते हैं।
कार्तिक श्याम और गणराऊ।
या छवि को कहि जात न काऊ॥
अर्थ: भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय और गणेश की छवि का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता।
देवन जबहीं जाय पुकारा।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
अर्थ: जब देवता भी दुखी होते हैं और भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं, तो भगवान शिव उनके दुखों का निवारण करते हैं।
किया उपद्रव तारक भारी।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
अर्थ: जब तारकासुर नामक राक्षस ने बहुत उपद्रव किया, तो सभी देवता भगवान शिव से प्रार्थना करने लगे।
तुरत षडानन आप पठायउ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
अर्थ: भगवान शिव ने तुरंत अपने पुत्र कार्तिकेय को भेजा, और उन्होंने एक क्षण में ही तारकासुर का वध कर दिया।
आप जलंधर असुर संहारा।
सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
अर्थ: भगवान शिव ने जलंधर नामक असुर का भी वध किया। उनकी कीर्ति संसार में विदित है।
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
अर्थ: त्रिपुरासुर नामक राक्षस के साथ युद्ध हुआ, तब भगवान शिव ने सभी देवताओं की रक्षा करते हुए उसका वध किया।
किया तपहिं भागीरथ भारी।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
अर्थ: राजा भागीरथ ने कठिन तपस्या की, जिससे गंगा को धरती पर लाया जा सके। भगवान शिव ने उनकी इच्छा पूरी की।
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।
सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
अर्थ: आप (शिव) से बड़ा कोई दानी नहीं है। आपके भक्त आपकी सदैव स्तुति करते हैं।
वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
अर्थ: वेदों में आपके नाम और महिमा का वर्णन किया गया है। आपकी उत्पत्ति और अंत का रहस्य कोई नहीं जानता।
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला।
जरत सुरासुर भए विहाला॥
अर्थ: समुद्र मंथन से जो जहरीला विष निकला उससे देवता और राक्षस दोनों जलने लगे और विह्वल हो गए।
कीन्ही दया तहं करी सहाई।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
अर्थ: तो भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर सबकी सहायता करी । इससे उनका गला नीला पड़ गया, इसलिए उन्हें नीलकंठ कहा जाता है।
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
अर्थ: भगवान राम ने जब आपकी पूजा की, तब उन्होने रावण को हरा कर लंका में विजय प्राप्त करी और विभीषण को लंका का राजा बनाया।
सहस कमल में हो रहे धारी।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
अर्थ: जब भगवान राम सहस्त्र कमलों से आपकी पूजा कर रहे थे, तो आपने उनकी भक्ति की परीक्षा ली।
एक कमल प्रभु राखेउ जोई।
कमल नयन पूजन चहं सोई॥
अर्थ: आपने एक कमल का फूल छिपा दिया। तब भगवान राम ने अपने कमल रूपी नेत्रों को निकाल कर आपको समर्पित कर आपकी पूजा करने का संकल्प लिया।
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
अर्थ: भगवान शंकर ने राम की दृढ़ भक्ति देखकर प्रसन्न होकर उन्हें मनचाहा वरदान दिया।
जय जय जय अनन्त अविनाशी।
करत कृपा सब के घटवासी॥
अर्थ: हे भगवान शिव, आप जन्म-मृत्यु के चक्र से परे हैं और अविनाशी हैं। आप सबके हृदय में विराजमान हैं और सब पर कृपा करते हैं।
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
अर्थ: बुरे विचार मुझे लगातार सताते हैं। मैं इधर-उधर भटकता रहता हूं और मुझे शांति नहीं मिलती।
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।
येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
अर्थ: हे नाथ (स्वामी), मैं आपको पुकार रहा हूं । इस वक्त आप आकर मुझे इस कष्ट से उबार लीजिए।
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।
संकट से मोहि आन उबारो॥
अर्थ: अपने त्रिशूल से मेरे शत्रुओं का नाश करो और मुझे संकटों से मुक्त करो।
मात-पिता भ्राता सब होई।
संकट में पूछत नहिं कोई॥
अर्थ: माता-पिता, भाई-बहन सभी होते हैं, लेकिन संकट के समय कोई भी साथ नहीं देता।
स्वामी एक है आस तुम्हारी।
आय हरहु मम संकट भारी॥
अर्थ: हे प्रभु मेरी आशा सिर्फ आप पर ही है। मेरे पर भारी संकट आया हुआ है।
धन निर्धन को देत सदा हीं।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अर्थ: आप गरीबों को सदा ही धन प्रदान करते हैं। आपसे जिस फल की कामना की जाती है वही फल प्राप्त होता है।।
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
अर्थ: आपकी स्तुति करने का सही तरीका क्या है? हे नाथ, अब तक हुई मेरी किसी भी चूक को क्षमा करें।
शंकर हो संकट के नाशन।
मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
अर्थ: आप (शंकर) संकटों का नाश करने वाले हैं। आप मंगल कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने वाले हैं।
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।
शारद नारद शीश नवावैं॥
अर्थ: योगी, यति और मुनि ध्यान लगाकर आपकी पूजा करते हैं। देवी सरस्वती और नारद मुनि भी आपके चरणों में शीश झुकाते हैं।
नमो नमो जय नमः शिवाय।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
अर्थ: आपको नमस्कार, आपको नमस्कार, जय शिव! देवता, ब्रह्मा आदि भी आपके स्वरूप का पता नहीं लगा सकते।
जो यह पाठ करे मन लाई।
ता पर होत है शम्भु सहाई॥
अर्थ: जो कोई भी इस पाठ को श्रद्धापूर्वक करता है, उस पर भगवान शंभु (शिव) की कृपा होती है।
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी।
पाठ करे सो पावन हारी॥
अर्थ: जिस पर भी अपने पूर्व कर्मों का ऋण है , वह इस पाठ को करे तो उन ऋणों से मुक्त हो पवित्र हो जाता है । अर्थात यह पाठ पापों का नाश करने वाला है।
पुत्र हीन कर इच्छा जोई।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
अर्थ: जो कोई संतान प्राप्ति की इच्छा रखता है, उसे निश्चित रूप से भगवान शिव की कृपा से संतान प्राप्त होती है।
पण्डित त्रयोदशी को लावे।
ध्यान पूर्वक होम करावे॥
अर्थ: पंडित को त्रयोदशी तिथि (हर महीने तेरहवीं तिथि) को बुलाकर विधिपूर्वक हवन करवाना चाहिए।
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।
ताके तन नहीं रहै कलेशा॥
अर्थ: जो व्यक्ति हमेशा त्रयोदशी का व्रत करता है, उसके शरीर में कोई रोग नहीं रहता है।
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
अर्थ: भगवान शंकर के सामने धूप, दीप और नैवेद्य चढ़ाकर उनका पाठ करना चाहिए।
जन्म जन्म के पाप नसावे।
अन्त धाम शिवपुर में पावे॥
अर्थ: इससे जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और अंत में मनुष्य शिवलोक में निवास करता है।
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥
अर्थ: अयोध्यादास कहते हैं कि हे भगवान शिव, मेरी आप पर ही आशा है। आप मेरे सभी दुखों को जानते हैं, इसलिए कृपया उन्हें दूर कर दें।
दोहा
नित्त नेम कर प्रातः ही,
पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना,
पूर्ण करो जगदीश॥
अर्थ: मैं प्रतिदिन सुबह नियमपूर्वक आपकी चालीसा का पाठ करता हूं। हे जगदीश (संसार के स्वामी), आप मेरी मनोकामनाएं पूरी करें।
मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि,
पूर्ण कीन कल्याण॥
अर्थ: यह चालीसा मगसर (मार्गशीर्ष) महीने की छठ (छठी) तिथि को हेमंत ऋतु (शीत ऋतु) संवत चोसठ में लिखी गई है । यह शिव जी की स्तुति करने वाली चालीसा है और इसका पाठ करने से कल्याण होता है।
Shiv Chalisa with English Translation
दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान।
Meaning: I bow down to Lord Ganesha, the son of Mother Parvati. He is the source of knowledge and well-being.
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान ॥
Meaning: I, Ayodhyadas, pray to you that you grant me the boon of fearlessness.
चौपाई
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
Meaning: O Lord Shiva, the husband of Girija (Parvati), the one who shows compassion to the poor, you always protect your devotees.
भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥
Meaning : The moon shines beautifully on Lord Shiva’s forehead. He wears earrings made of snakes.
अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥
Meaning : Lord Shiva’s body is fair in complexion and the Ganges River flows on his head. He wears a garland of skulls and has smeared ashes on his body.
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे॥
Meaning :Lord Shiva is wearing a tiger skin garment. Even the snakes are mesmerized by seeing his image.
मैना मातु की हवे दुलारी।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
Meaning :The beloved daughter of Mother Maina, Parvatiji, adorns your left side. Her beauty is unique and incomparable.
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥
Meaning :Lord Shiva’s hand is adorned with a trident. He always destroys his enemies.
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
Meaning :Lord Shiva is seated with Nandi and Ganesha. They look like a lotus in the middle of the ocean.
कार्तिक श्याम और गणराऊ।
या छवि को कहि जात न काऊ॥
Meaning :The image of Lord Shiva’s sons, Kartikeya and Ganesha, cannot be described in words.
देवन जबहीं जाय पुकारा।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
Meaning :Even when the gods themselves are unhappy and pray to Lord Shiva, Lord Shiva removes their sorrows.
किया उपद्रव तारक भारी।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
Meaning :When the demon named Tarakasura caused a lot of trouble, all the gods started praying to Lord Shiva.
तुरत षडानन आप पठायउ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
Meaning :Lord Shiva immediately sent his son Kartikeya, and he killed Tarakasura in an instant.
आप जलंधर असुर संहारा।
सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
Meaning :Lord Shiva also killed the demon named Jalandhara. His fame is known throughout the world.
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
Meaning :A war took place with the demon named Tripurasura. Lord Shiva then killed him while protecting all the gods.
किया तपहिं भागीरथ भारी।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
Meaning :Raja Bhagirath performed a difficult penance, which brought the Ganges River to Earth. Lord Shiva fulfilled his wish.
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।
सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
Meaning : There is no greater giver than you (Shiva). Your devotees always praise you.
वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
Meaning : Your name and glory are described in the Vedas. No one knows the mystery of your origin and end.
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला।
जरत सुरासुर भए विहाला॥
Meaning :From the churning of the ocean, a poisonous substance emerged that burned and terrified both the gods and the demons.
कीन्ही दया तहं करी सहाई।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
Meaning : So Lord Shiva held it in his throat and helped everyone. This turned his throat blue, which is why he is called Neelkanth
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
Meaning :When Lord Rama worshipped you, he defeated Ravana and achieved victory in Lanka, and made Vibhishana the king of Lanka.
सहस कमल में हो रहे धारी।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
Meaning : When Lord Rama was worshipping you with a thousand lotuses, you tested his devotion
एक कमल प्रभु राखेउ जोई।
कमल नयन पूजन चहं सोई॥
Meaning : You hid one lotus flower. Then Lord Rama decided to offer you his lotus-like eyes and worship you.
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
Meaning : Lord Shiva, seeing Rama’s unwavering devotion, was pleased and gave him the desired boon.
जय जय जय अनन्त अविनाशी।
करत कृपा सब के घटवासी॥
Meaning : O Lord Shiva, you are beyond the cycle of birth and death, you are indestructible. You reside in the hearts of all and shower your grace on everyone.
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
Meaning :Evil thoughts constantly haunt me. I keep wandering here and there and I don’t find peace.
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।
येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
Meaning : O Lord (Swami), I am calling you. Please come and save me from this suffering
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।
संकट से मोहि आन उबारो॥
Meaning :Destroy my enemies with your trident and free me from trouble.
मात-पिता भ्राता सब होई।
संकट में पूछत नहिं कोई॥
Meaning : One has parents, siblings, and everyone, but no one stands by them in times of crisis.
स्वामी एक है आस तुम्हारी।
आय हरहु मम संकट भारी॥
Meaning : O Lord, my hope is only in you. I am facing a great crisis.
धन निर्धन को देत सदा हीं।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
Meaning :You always provide wealth to the poor. The fruit that is desired from you is obtained.
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
Meaning :What is the right way to praise you? O Lord, forgive any mistakes I have made so far.
शंकर हो संकट के नाशन।
मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
Meaning : You (Shiva) are the destroyer of troubles. You are the one who removes obstacles in auspicious works.
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।
शारद नारद शीश नवावैं॥
Meaning : Yogis, yatis, and munis meditate and worship you. Even Goddess Saraswati and Narada Muni bow their heads at your feet.
नमो नमो जय नमः शिवाय।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
Meaning :“Hail Shiva! Even the gods, Brahma and others, cannot fathom your true form.”
जो यह पाठ करे मन लाई।
ता पर होत है शम्भु सहाई॥
Meaning : “Anyone who recites this text with devotion will receive the grace of Lord Shambhu (Shiva).”
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी।
पाठ करे सो पावन हारी॥
Meaning : “Anyone who is burdened by the debts of their past actions will be freed from those debts and become purified by reciting this text.
In other words, this text is a destroyer of sins.”
पुत्र हीन कर इच्छा जोई।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
Meaning : “Anyone who desires to have children will surely receive children by the grace of Lord Shiva.”
पण्डित त्रयोदशी को लावे।
ध्यान पूर्वक होम करावे॥
Meaning : “A priest should be called on the Trayodashi Tithi (thirteenth day of every month) to perform a Havan in accordance with the prescribed rituals.”
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।
ताके तन नहीं रहै कलेशा॥
Meaning : “The person who always observes the Trayodashi fast will not have any diseases in his body.”
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
Meaning : One should offer incense, lamp, and naivedya (food offering) to Lord Shiva and recite his prayers.
जन्म जन्म के पाप नसावे।
अन्त धाम शिवपुर में पावे॥
Meaning : By doing this, the sins of birth after birth are destroyed and in the end, the man resides in Shivlok.
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥
Meaning : Ayodhyadas says, “O Lord Shiva, my only hope is in you. You know all my sorrows, so please remove them.”
दोहा
नित्त नेम कर प्रातः ही,
पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना,
पूर्ण करो जगदीश॥
Meaning : I regularly recite your Chalisa every morning. O Jagdish (Lord of the Universe), please fulfill my wishes.
मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि,
पूर्ण कीन कल्याण॥
Meaning : This Chalisa was written on the sixth day of the month of Magsar (Margashirsha) in the Hemant season (winter season) in the Hindu year 64. It is a Chalisa that praises Lord Shiva and its recitation brings well-being.