Shanivaar Vrat Katha | Raja ki Satya Nishtha

शनिवार की कथा

कहानी का संक्षिप्त सार

राजा ने न बिकने वाला माल उचित मूल्य देकर खरीदने की घोषणा की। उसने लोहे की शनिदेव की मूर्ति को भी स्वीकार किया। शनि के महल में रहने पर लक्ष्मी और अन्य गुण चले गए, लेकिन राजा ने सत्य को जाने से रोक लिया। सत्य प्रेम के कारण सभी लौट आए और शनि तथा लक्ष्मी एक साथ रहने लगे।

कथा

राजा की सौदागरों के लिए घोषणा

एक राजा था। उसने अपने राज्य में यह घोषणा कर रखी थी, कि दूर-दूर से जो सौदागर बाजार में माल बेचने आये, और जिस भी सौदागर का माल नहीं बिकेगा, तो उसका सारा माल राजा खरीद लेगा। सौदागर प्रसन्न हो गये।

जब भी किसी सौदागर का माल नहीं बिकता, तो राजा के आदमी उसे उचित मूल्य देकर, उसका सारा माल खरीद लेते।

लोहे की शनिदेव की मूर्ति

एक दिन की बात है। एक लोहार लोहे की शनिदेव की मूर्ति बनाकर लाया। लेकिन उस मूर्ति का कोई खरीददार नहीं मिला। उस मूर्ति को भी राजा के आदमी, राजा के पास लेकर आए, और राजा ने उसे सम्मान पूर्वक अपने पास रख लिया।

लक्ष्मी का महल से जाना

शनिदेव के घर में आ जाने से राजा के सब देवी-देवता नाराज हो गये। रात के अंधेरे में राजा ने एक तेजस्वी स्त्री को घर से जाते देखा। राजा ने उससे पूछा, की आप कौन हैं? वह बोली मैं लक्ष्मी हूँ। तुम्हारे महलों में शनि का वास है। मैं यहाँ नहीं रह सकती।

वैभव का महल से जाना

राजा ने उसे नहीं रोका। कुछ समय बाद राजा ने, एक देव पुरुष को घर से जाते देखा। उनसे भी राजा ने पूछा, की आप कौन हैं? तो वे बोले की, मैं वैभव हूँ। सदा लक्ष्मी के साथ रहता हूँ। जब लक्ष्मी नहीं तो मैं भी नहीं रह सकता। राजा ने उन्हे भी नहीं रोका।

धर्म, धैर्य और क्षमा का जाना

इसी प्रकार धीरे-धीरे धर्म, धैर्य, क्षमा आदि गुण भी एक-एक करके चले गये। राजा ने किसी को रोकने का अनुरोध नहीं किया।

सत्य देव को रोकना

अन्त में जब सत्य भी जाने लगे, तब राजा के पूछने पर उन्होने कहा की, जहाँ लक्ष्मी, धर्म, वैभव, धैर्य आदि का वास नहीं है, वहाँ मैं भी नहीं रह सकता।

तो राजा सत्य देव के पैरों पर गिर पड़ा। महाराज आप कैसे जा सकते हैं? आपके बल पर तो मैंने लक्ष्मी, वैभव, धैर्य धर्म आदि सभी को जाने दिया।

आपको नहीं जाने दे सकता। राजा को इतना आग्रह करते देखकर सत्य देव रुक गए।

सत्य के साथ गुणों की वापसी

महल के बाहर सभी सत्य देव की राह देख रहे थे। उन्हे न आता देखकर, धर्म देव बोले की, मैं सत्य के बिना नहीं रह सकता, इसलिए वापस राजा के महल में जा रहा हूँ।

धर्म के पीछे पीछे, क्षमा, वैभव, लक्ष्मी, सभी लौट आए। तथा राजा से कहने लगे कि, तुम्हारे सत्य प्रेम के कारण ही हमें लौटना पड़ा।

तुम जैसा राजा दुखी नहीं रह सकता। सत्य प्रेम के कारण शनि और लक्ष्मी एक साथ रहने लगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. प्रश्न: राजा ने सौदागरों के लिए क्या घोषणा कर रखी थी? उत्तर: राजा ने घोषणा की थी कि जिस सौदागर का माल नहीं बिकेगा, उसका सारा माल राजा उचित मूल्य देकर खरीद लेगा।
  2. प्रश्न: लोहार राजा के पास क्या लेकर आया था? उत्तर: लोहार लोहे की शनिदेव की मूर्ति बनाकर लाया था।
  3. प्रश्न: लक्ष्मी राजा के महल से क्यों चली गईं? उत्तर: लक्ष्मी ने कहा कि महलों में शनि का वास है, इसलिए वह वहाँ नहीं रह सकतीं।
  4. प्रश्न: राजा ने सत्य देव को जाने से क्यों रोका? उत्तर: राजा ने कहा कि लक्ष्मी, वैभव, धैर्य और धर्म आदि को उसने सत्य के बल पर जाने दिया, लेकिन वह सत्य देव को जाने नहीं दे सकता।
  5. प्रश्न: सत्य प्रेम के कारण अंत में क्या हुआ? उत्तर: धर्म, क्षमा, वैभव और लक्ष्मी वापस लौट आए तथा शनि और लक्ष्मी एक साथ रहने लगे।

Vrat Katha Sangrah

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