शनि भगवान और ब्राह्मण की कथा
कहानी का संक्षिप्त सार
एक बुद्धिमान ब्राह्मण ने सारी प्रजा की रक्षा के लिए शनि भगवान को केवल ‘सवा पहर’ के लिए अपने पास रोका। इतने ही समय में नदी के मतीरे राजकुमारों के सिर बन गए, जिसके कारण ब्राह्मण पर झूठा आरोप लगा और उसे सूली की सजा सुनाई गई। किंतु सवा पहर पूरा होते ही राजकुमार सुरक्षित घर लौट आए। अंत में ब्राह्मण ने राजा को शनि दशा के सरल और प्रभावी उपाय बताए।
कथा
शनि भगवान से भेंट और प्रजा की रक्षा का निवेदन
एक ब्राह्मण पूजा पाठ करने जा रहा था ! उसे रास्ते में शनि भगवान मिले । ब्राह्मण बोला, शनि महाराज आप कहाँ जा रहे हो? शनि भगवान बोले, राजा की शनि दशा आ गयी है, वहीं जा रहा हूँ । ब्राह्मण ने सोचा, इस कारण से तो सारी प्रजा दुःखी हो सकती है। सो ब्राह्मण , सारी प्रजा के हित हेतु, शनि भगवान से बोला, की राजा से यहाँ आप जाओगे तो सारी प्रजा पर प्रभाव पड़ सकता है। आप मेरे पास ही ठहर जाओ।
सवा पहर के लिए शनि देव का ठहरना
शनि भगवान बोले की कितने समय के लिए ठहरूँ । ब्राह्मण बोला, सात साल नहीं, पाँच साल नहीं, ढाई साल नहीं, सवा साल नहीं, सवा पहर के लिए ही रूको । ब्राह्मण नदी के किनारे गया और आसन बिछाकर पाठ करने लगा । नदी में दो मतीरे बहे जा रहे थे । ब्राह्मण ने उन्हे निकालकर अपने पैरों के नीचे रख लिया। थोड़ी ही देर में वह मतीरे राजा के लड़के के सिर बन गए । अब उसके पास शनि भगवान आए और पूछा की, ब्राह्मण तुमने राजा के लड़के के सर काट कर रखे हैं? तो ब्राह्मण ने कहा की ये बात किसी से मत कहना की मुझे शनि की दशा लगी है । फिर शनिदेव भेष बदलकर नगर में गए, और एक आदमी से बोले की, नदी किनारे एक ब्राह्मण ने राजा के बेटों के सिर काट कर रखें हैं। देखते ही देखते यह बात पूरे नगर में फैल गई । और अंततः यह बात राजा के पास भी पहुंची। राजा बोला ब्राह्मण को सूली पर चढ़ा दो । सभी तैयारियां की गई । इतनी देर में ब्राह्मण का शनि दशा का सवा पहर पूरा हो गया । तो राजा के लड़के खेलते-खेलते अपने घर आ गये ।
रानी का हस्तक्षेप और राजा की जांच
अब रानी बोली, महाराज ब्राह्मण को सूली पर चढ़ा दिया होगा। जाकर देखो नहीं तो निरपराध ब्राह्मण को सजा देने का हमारा पाप कैसे उतरेगा ? राजा ने जाकर देखा, तो ब्राह्मण को सूली चढ़ाने ही वाले थे । राजा ने पूछा ब्राह्मण यह सब क्या था ?
शनि दशा के सरल और प्रभावी उपाय
ब्राह्मण बोला – मैं तो पाठ करने जा रहा था। रास्ते में शनि भगवान मिले, मैं बोला – महाराज कहाँ जा रहे हो। वे बोले की राजा के यहाँ जा रहा हूँ । मैंने बोला – राजा के यहाँ जाओगे तो सारी प्रजा दुखी होगी । इसलिए मेरे पास ही ठहर जाओ । शनि भगवान बोले, कितने समय के लिए ठहरूँ? मैंने कहा सवा पहर के लिए ठहर जाओ । अब सवा पहर में ही मैं सूली चढ़ने वाला हूँ , और मेरी यह हालत हो गयी है । राजा कहने लगा, शनि भगवान की दशा कैसे उतरती है ? तो ब्राह्मण ने कहा राजा सोने, चांदी का दान, तांबे का दान, लोहे का दान, पीतल का दान करना फलदायी होता है । राजा ने कहा, अमीर आदमी तो ऐसे महंगे दान कर देगा, लेकिन गरीब कैसे करें ? ब्राह्मण बोला – तेल की पल्ली, गुड़ की डली का भी दान किया जा सकता है। सात वार तक , सात बार पीपल में जल चढ़ा दे और कह दे शनि देव का सोटा कभी ना आवे टोटा । या फिर “शनिवार की घड़ी ले, सतर बला टली”, ऐसा कह कर सात बार पीपल में जल चढ़ा दे तो सारी बला टल जायेगी । राजा ने ब्राह्मण को धन्यवाद कहा और ब्राह्मण के बताए अनुसार नियमित उपाय करने लगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- प्रश्न: ब्राह्मण ने शनि भगवान से कितने समय के लिए रुकने का निवेदन किया? उत्तर: ब्राह्मण ने सात साल, पाँच साल, ढाई साल या सवा साल के बजाय केवल ‘सवा पहर’ के लिए रुकने का निवेदन किया।
- प्रश्न: नदी के मतीरे (मिट्टी के लोथड़े) पैरों के नीचे रखने का क्या परिणाम हुआ? उत्तर: थोड़ी ही देर में वह मतीरे राजा के लड़कों के सिर बन गए, जिसके कारण ब्राह्मण पर झूठा आरोप लगा।
- प्रश्न: शनि दशा से बचने के लिए कौन-कौन से दान करने चाहिए? उत्तर: सोने, चांदी, तांबे, लोहे और पीतल का दान फलदायी है। गरीब व्यक्ति तेल की पल्ली या गुड़ की डली का दान कर सकता है।
- प्रश्न: पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाते समय क्या कहना चाहिए? उत्तर: “शनि देव का सोटा कभी ना आवे टोटा” या “शनिवार की घड़ी ले, सतर बला टली” कहकर सात शनिवार तक पीपल में जल चढ़ाने से सारी बला टल जाती है।
