कहानी
सुख अमावस्या की दूसरी कहानी
ब्राह्मण और ब्राह्मणी
एक ब्राह्मण और ब्राह्मणी थे। वे दोनों भगवान के भक्त थे। घर में सब कुछ था पर उनके कोई सन्तान नहीं होने से वे अति दुःखी रहते थे। एक दिन ब्राह्मण अपनी स्त्री से वन में तपस्या करने की कहकर और भगवान पर भरोसा करके वन में चला गया।
वन में तपस्या
जंगल में जाकर तप करने लगा। बहुत वर्ष बीत गये और उसको वैराग्य हुआ कि अब अपना जीवन समाप्त कर दूंगा। इस प्रकार सोच कर वह पेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर, मरने को तैयार हो गया। तब सुख अमावस् माता प्रगट होकर बोली – देख ब्राह्मण ! तुम्हे सात जन्म तो कोई संतान नहीं लिखी है। किन्तु में तुम्हें दो कन्या का वरदान देती हूँ। एक का नाम अमावस्या दूसरी का नाम पूनम रख देना।
सुख अमावस्या माता का वरदान
तेरी स्त्री को कह कि, सुख अमावस्या का व्रत या उपवास करे। अमावस् के दिन एक कटोरी चावल पर दक्षिणा रखकर किसी मंदिर में रखना, और ऐसा एक साल तक करना। एक कटोरी चावल सहित दान करते रहना। ब्राह्मण घर आया। अपनी पत्नी को बताया और अमावस् के दिन ब्राह्मणी ने व्रत रखा।
दो कन्याओं का जन्म
कुछ दिन बाद उसके दो कन्या हुई। तब उसने एक का नाम अमावस्या व दूसरी का नाम पूनम रखा। धीरे-धीरे दोनों बड़ी होने लगी । फिर उनका विवाह हुआ।
बहनों का जीवन
बड़ी बहिन अमावस् धार्मिक थी, जबकि छोटी बहन पूनम, भगवान को बिल्कुल नहीं मानती थी। बड़ी बहन के घर में तो सुख समृद्धि का भण्डार भरपूर था। पर छोटी बहिन पूनम के दुःख का पार नहीं था। जब बड़ी बहिन अमावस् को छोटी बहन के बारे में सब मालूम हुआ कि उसको बहिन दुःखी है। तब बड़ी बहन अमावस्या, गाड़ी भरकर समान लेकर गई और छोटी बहिन को कहा – बहिन पूनम ! सुख अमावस् का व्रत तुम भी करो। और पूजा करके उपवास करो। जिससे तुम्हारे घर में सुख समृद्धि का भण्डार भरेगा।
व्रत और सुख-समृद्धि
एक साल तक चावल का कटोरा भर कर दक्षिणा के साथ दान करना।” पूनम ने ऐसा ही किया। कुछ दिनों बाद उसके भी घर में धन-धान्य और सन्तान की वृद्धि होने लगी। इस प्रकार जो भी सुख अमावस्या का व्रत आदि, विधि पूर्वक करेगा उसके घर में सुख समृद्धि का भण्डार, मां सुख अमावस्या पूर्ण करेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कहानी में ब्राह्मण और ब्राह्मणी किस बात से दुःखी थे?
ब्राह्मण और ब्राह्मणी निःसंतान होने के कारण दुःखी थे।
सुख अमावस्या माता ने ब्राह्मण को कौन-सा वरदान दिया?
सुख अमावस्या माता ने ब्राह्मण को दो पुत्रियों का वरदान दिया।
ब्राह्मणी को अमावस्या के दिन क्या करना था?
ब्राह्मणी को अमावस्या के दिन व्रत रखना था और एक कटोरा चावल दक्षिणा सहित दान करना था।
दोनों कन्याओं के नाम क्या रखे गए?
दोनों कन्याओं के नाम अमावस्या और पूनम रखे गए।
पूनम के घर में सुख-समृद्धि कैसे आई?
पूनम ने अमावस्या के दिन व्रत रखा और एक कटोरा चावल दक्षिणा सहित दान किया, जिसके बाद उसके घर में सुख-समृद्धि आई।
